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विचार: हमारे देश की राजनीतिक और आर्थिक ताकत क्यों कुछ परिवारों तक ही बंधी हुई है?

Published on January 26 2019 01:29 pm  |  Author: अबुवहाब चौधरी

भारत एक ऐसा देश है जहाँ की राजनीती में हर कोई दिलचस्पी लेता है वहीं हमारे देश में हर कोई व्यापार करना चाहता है पता है क्यों? क्योकि यहाँ लोग भावनाओं से प्रेरित होते है। खैर चलिए मुद्दे पर आते है। देश की चिंता करने वाले लोग खुद से यहीं क्यूँ पूछते है कि भारत के लोकतंत्र की पूरी ताक़त क्यों कुछ परिवारों तक ही सिमट कर रही गयी है। चाहे वो आर्थिक हो या राजनीतिक।

पिछले 3 दिन से मीडिया की 2 हैडलाइन ने सबका रुख अपनी तरफ खींचा। पहली हेडलाइन थी क्या प्रियंका गाँधी वाड्रा कांग्रेस की नैया पार लगा पायेगी? दूसरा ओक्स्फोम की एक रिपोर्ट (पब्लिक गुड और प्राइवेट हेल्थ) ने एक खुलासा किया कि जितनी संपत्ति भारत की 50% जनता जो निचली पायदान पर खड़ी है उनके पास है, उतनी ही देश के केवल 9 धनी लोगो के पास संपत्ति है।

ऐसा नहीं की परिवारवाद केवल कांग्रेस में है बल्कि ये पूरे देश की राजनीति में फैला हुआ है। अब चाहे वह ममता, अखिलेश, मायावती, केटीएस, लालू, चंद्रबाबू हो पर परिवारवाद बीजेपी हर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टी में देखने को मिलता है। यहाँ तक कि आम आदमी पार्टी में भी व्यक्तिवाद की बू आती है। इसमें किसी बहस और सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगने की ज़रुरत नहीं है यह हम सबके सामने है और हम सब वाकिफ है की देश की ताक़त अब चुनिन्दा परिवारों के पास है।

जहाँ किसान परेशान है, रोजगार देश में है नहीं, छोटे मोटे दुकानदारों का काम ठप हो रहा है और फिर भी 2017 के मुकाबले 2018 में देश के खरबपतियों की सूचि में इजाफा हुआ हो वो भी नोटबंदी के समय पर। इसमें नए 18 नाम जुड़ चुके है जिसकी संख्या 119 तक पहुँच चुकी है। इतना ही नहीं इनकी संपत्ति बहुत तेज़ी से बढ़ी इनकी संपत्ति 23 लाख करोड़ से बढ़कर 31 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुकी है।

ओक्स्फोम की रिपोर्ट ने यह भी बताया कि दुनिया के 19वे धनी आदमी मुकेश अंबानी है और जिनके पास दुनिया का सबसे महंगा घर है। जिसका नाम एंटीला है और जो मुंबई में स्थित है इसकी कीमत 7 हजार करोड से ऊपर बताई गयी है।

इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि पूरी दुनिया में बीमारी के इलाज खर्च के चलते गरीबी में धकेले जाने वाले सबसे ज्यादा लोग भारत में है। क्योकि जनता के स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च करने में हमारी सरकारे सबसे अव्वल नम्बर पर आती है। अगर आपके पास पैसे है तो आपको अच्छा इलाज मिलेगा अगर नहीं तो फिर गारंटी नहीं। वहीं स्वास्थय बीमा के नाम पर की जाने वाली 80% धनराशी भी निजी अस्पतालों में जाती है।

शिक्षा में भी ऐसा ही है उत्तर प्रदेश में 40% गरीब बच्चे सबसे कम फीस वाले निजी स्कूल की फीस भी नहीं दे सकते। हमारी सरकारे अब निजी स्कूलों पर निर्भर होती जा रही है। वहीं गरीबी की मार दलित के ऊपर सबसे ज्यादा पड़ती है। दलित महिला उच्च जाति की महिला के मुकाबले 15 साल कम जीती है।

इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में लोगो की संपत्ति पर जितना कर होना चाहिए वह 8 गुना कम कर दिया जाता है और मोदी सरकार ने तो यह कर 2016 और 2017 में ख़त्म ही कर दिया है। वहीं इस रिपोर्ट से बाहर जाकर रेवेनुए फ़ोर्गेंन की रिपोर्ट पर नज़र डाले तो 2013-14, 2014-15 और 2015-16 में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रूप से 17 लाख करोड़ करोड़ की छुट दी गयी। इसके बाद के वर्षो में भी यह छुट लगातार चली लेकिन मोदी सरकार ने इसका नाम और तरीका ही बदल दिया। 2015-16 में इसे 4 लाख 82 हजार करोड़ रूपये से ऊपर की छुट अप्रत्यक्ष कर में छुट देना बताया वहीं 2 लाख 24 हजार करोड़ से ऊपर एक्साइज ड्यूटी तथा 2 लाख 57 हजार करोड़ से ऊपर कस्टम ड्यूटी में दी।

अमीर की मार से सरकारी बैंक भी नहीं बच सके, इन बैंकों का एनपीए मार्च 2014 में 2,16,739 था वहीं मार्च 2018 में यह एनपीए 8,45,775 हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है की अमीर लोगो द्वारा की जा रही टैक्स में चोरी पर लगाम लगायी जाये और अमीर लोगो को टैक्स में छुट को ख़त्म करके उनपर उचित टैक्स लगाया जाये।

कुछ मीडिया संस्थानों को कुछ पार्टियों का इतना मोटा धन दिया जा चूका है कि वे उस पार्टी और उनके नाम के भोंपू दिन रात बजा रहे है। और अब लोकसभा चुनाव 2019 सिर पर है तो अब बस उनकी वाह-वाह देखने को आपको मिलेगी। क्या ये मीडिया हाउस ये खबर अपने चैनल पर चल पाएंगे?

प्रियंका गाँधी ने राजनीती में सक्रिय प्रवेश किया तो सबने अपने भोंपू उसकी और कर दिए। क्या यह कांग्रेस को सत्ता दिलाएगी? क्या प्रियंका गाँधी उत्तरप्रदेश को जीत पायेगी?

क्या हमारा लोकतंत्र अब सिर्फ चुनिन्दा परिवारों के हाथ में रहेगा? अगर ऐसा है तो क्या फिर लोकतंत्र ख़त्म नहीं होगा? क्या मंदिर-मस्जिद, गायो से ऊपर उठकर राजनीती की जाएगी? अगर इनसे ऊपर कुछ नहीं हुआ तो फिर ये कैसा लोकतंत्र है? जहाँ पूरे देश की ताक़त 10 लोगो के हाथ में हो और पूरा देश चुप बैठकर मीडिया के भोंपू सुन रहा हो?

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About अबुवहाब चौधरी
अबुवहाब चौधरी मुम्बई के रहवासी और इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये एक समाचार एवं फिल्म लेखक है। वहाब पत्रकारिता में किसी किस्म का पक्षपात नहीं करते एवं ताज़ा खबरों की तलाश में रहते है। Email- abuwahabchaudhary@gmail.com

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