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परम्पराओं को खत्म कर समाज सुधारक के नए रूप के साथ चुनावी मैदान में जा सकते हैं मोदी

 Image Credit: PTI

Published on September 29 2018 05:48 pm  |  Author: हितेश कुमार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 की तुलना में घटती लोकप्रियता के बाद जनता को अपने पक्ष में करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। लगभग साढ़े 4 वर्ष के समय बीत जाने के बाद सरकार को चुनाव जीतने की चिंता सता रही है। सत्ता में रहकर किए गए कार्यों के बदौलत चुनावी मैदान में जाने से हार का खतरा मंडरा रहा है। अचानक सर्वोच्च न्यायालय में पेंडिंग विवादित मुद्दो को खुलवा कर फैसला करवाना हार से बचने का एक कोशिश तो नहीं है। आखिर देश का सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इन विवादित और लम्बित याचिकाओं पर इतनी जल्दी क्यों?

धारा-377 में वर्णित समलैंगिकता के प्रावधानों के मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय ने गैरकानूनी करार दिया था। 7 सितंबर 2018 को सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दो वयस्को के बीच अप्राकृतिक संबंध गैरकानूनी नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय के संविधान पीठ में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, डीवाई चंद्रचूड़, ए एम खानविलकर समेत 5 जजों के पीठ ने यह फैसला सुनाया है। पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि एलजीबीटी (लैसबियन, गे, बाई सेक्सुअल, ट्रांसजेंडर) को भी अन्य नागरिकों के समान जीने का अधिकार है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से घरों के चहारदीवारियों में बंद  एलजीबीटी के लोगों के लिए सामाजिक बंदिशे टूटी है। इस फैसले के बाद खासकर दक्षिण भारत में काफी संख्या में रह रहे एलजीबीटी के लोगों ने खुशियां मनाएं।

संविधान पीठ ने अयोध्या विवाद पर नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद की जरूरत के मुद्दे पर गुरुवार यानी 27 सितंबर को अपने फैसले पर पुनर्विचार से इंकार कर दिया। फैसला सुनाते हुए संविधान पीठ ने कहा कि नमाज अदा करने के लिए मस्जिद का होना आवश्यक नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, आदि का अधिग्रहण किया जा सकता है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद पर सुनाया गया फैसला पर कोई असर नहीं पड़ा है। गौरतलब है कि साल 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने यही फैसला सुनाया था। राजनीतिक जानकारों की मानें तो राम जन्मभूमि विवाद पर कोर्ट का रुख लगभग साफ हो चुका है। हालांकि अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद के मुद्दे पर सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित किया गया है।

आईपीसी की धारा 497 को बताया गैरकानूनी

सर्वोच्च न्यायालय ने आईपीसी की धारा 497 को असंवैधानिक करार देते हुए कहा है कि महिलाओं के साथ विवाहेत्तर संबंध गैरकानूनी नहीं है। साथ ही साथ यह भी कहा कि विवाहेत्तर संबंध तलाक का आधार बन सकता है। लेकिन गैर कानूनी नहीं है। गौरतलब है कि आईपीसी की धारा 497 के मुताबिक शादी के बाद महिला की सहमति से दूसरे के साथ किए गए अनुचित संबंध पर उसका पति द्वारा पुरुष पर एडल्ट्री का मुकदमा दर्ज किया जा सकता था। जबकि महिला को पीड़िता के रूप में रखा जाता था। इस कानून में पति की सहमति से पत्नी को दूसरे मर्द से संबंध बनाने का प्रावधान भी किया गया था।

केरल के पंपा क्षेत्र में स्थित सबरीमाला के मंदिर में महिलाओं की प्रवेश पर 800 साल पुराने लगे प्रतिबंध को कल 28 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया। सैकड़ों वर्ष से इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा हुआ था। इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए आयु प्रमाण पत्र के साथ उनकी जांच भी की जाती थी। गौरतलब है कि इस मंदिर में 10 वर्ष से कम उम्र के बच्ची या 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिला को ही प्रवेश की अनुमति थी। जानकार बताते हैं कि मासिक माहवारी की वजह से महिलाओं के मंदिर में प्रवेश वर्जित था। कोर्ट ने कहा कि यह प्रतिबंध महिलाओं के समानता और उनकी अधिकारों के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि वर्षों से चली आ रही परंपरा धार्मिक अंग नहीं हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिलाओं के पूजा से वंचित करने का मतलब उनके अधिकारों से वंचित करने के समान माना जाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पिछले 1 हफ्ते से लगातार एक के बाद एक फैसला सुनाए जाने का मकसद यह तो नहीं कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की  आम लोगों के बीच घटती लोकप्रियता के वजह से सर्वोच्च न्यायालय को बैसाखी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मतलब स्पष्ट है कि इन सभी फैसले से बीजेपी समाज सुधारक की छवि बनाने की कोशिश में जुटी है। खास कर एलजीबीटी और सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर हुआ फैसला से भाजपा को दक्षिण भारत में अपना पैर जमाने में मदद मिल सकता है। बताते चलें कि सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा इस महीने के 30 तारीख को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

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About हितेश कुमार
हितेश कुमार इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये पौथु (बिहार) के रहने वाले है। हितेश पत्रकारिता में अभिरुचि होने के कारण विभिन्न विषयों पर अपने विचार लिखने की काबिलियत रखते है। इन्होने पत्रकारिता के क्षेत्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त कर, विभिन्न मीडिया हाउस में कार्य किया है। Email- hiteshkumarminku@gmail.com

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