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केंद्र की राज व्यवस्था जैसे “तांगा पलटा घोड़े फरार”, सरकार का कुत्ता है सीबीआई, राकेश अस्थाना है शार्पशूटर : शिवसेना

Published on October 31 2018 04:48 pm  |  Author: अबुवहाब चौधरी

शिवसेना पार्टी इसे कौन नहीं जानता? अगर जो इसे नहीं जानता तो मान लीजिये वो राजनीति का एक अक्षर भी नहीं जानता। शिवसेना बीजेपी के साथ गठबंधन में है। लेकिन फिर भी उन्होने ऐसे कड़े शब्दों का प्रयोग किया है जो शायद कांग्रेस बोलने से पहले हज़ार बार सोचेगी। शिवसेना के मुख्य समाचार पत्र “सामना” में एक लेख छपा है। जिसमे उन्होंने अपने ससम्पादकीय लेख में बीजेपी पर बहुत तीखा वार किया है। उन्होंने लिखा है, कि “सीबीआई पर पहले भी आरोप लगे है पहले भी कीचड उछले है लेकिन अब जो चल रहा है उससे तो ऐसा लगता है मानो सीबीआई सरकार के घर बंधा एक कुत्ता हो”।

हाल ही के दिनों में सामना में एक लेख छपा जिसे शीर्षक दिया “चोपिस्टिक की काड़ी” (मतलब ये की मोदी जी जापान में चोपिस्टिक से खाना खाना सीख रहे है और यहाँ देश में सबसे बड़ी जांच संस्था पर सवाल उठ रहे है) जिसमे उन्होंने लिखा कि "दिल्ली की राज व्यवस्था मानो ऐसे हो गयी है... जैसे तांगा बग्गी पलटी घोड़े हो गए फरार। अभी कुछ महीने पहले ही हमारे देश के सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने बगावत को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की थी और अब ये सीबीआई में तहलका मचा पड़ा है। यहाँ देश में अराजकता फैली हुई है और ,मोदी जी जापान में चोपिस्टिक से खाना खाते हुए चोपिस्टिक डांडिया खेल रहे है।"

उन्होंने आगे लेख में लिखते हुए कहा, कि "सीबीआई पर पहले भी कीचड उछला है लेकिन जैसा अब हो रहा है मानो सीबीआई सरकार के घर बंधा एक कुत्ता हो और उस कुत्ते के पेट में हर कोई लात मार रहा है, यह तस्वीर अच्छी नहीं है।" शिवेसेना ने लिखा है कि मोदी सरकार द्वारा राकेश अस्थाना को वहां स्पेशल निदेशक के तौर पर गठित किया गया और फिर पीएमओ के नाम पर जो सीधे हस्तक्षेप हुए उन्ही की वजह से “वर्मा बनाम अस्थाना” हो गया। जिससे सीबीआई के लोगो ने ही सीबीआई के लोगो पर छापे मारे और गिरफ़्तारी भी की। शिवसेना ने आगे लिखा कि राहुल गाँधी ने अस्थाना को रफाले डील की जांच से जोड़ा और अस्थाना जो गुजरात कैडर के अधिकारी है वह मोदी और शाह के ख़ास है और जो भाजपा के शार्पशूटर के नाम से जाने जाते है।

लेख में बताया गया कि लालू के चारा घोटाले में यही अधिकारी जांच कर रहे थे। जिससे लालू को जेल हुई और भाजपा ने नितीश के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनायीं और मोदी ने 2002 में गुजरात दंगो में भी अस्थाना को जांच के लिए गठित किया था।

सामना के लेख में आगे कहा गया कि देश की राज व्यवस्था का एक एक खम्भा ध्वस्त किया जा रहा है। कैबिनेट का कोई मतलब नहीं रहा गृहमंत्री है लेकिन सीबीआई जैसी संस्थाओ पर पीएमओ से नियंत्रण किया जा रहा है। संसद का कोई महत्त्व नहीं रहा गया है। देश के प्रमुख स्तंभों की कीमत अब एक “चोपिस्टिक की काडी” के बराबर भी नहीं रही है।

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About अबुवहाब चौधरी
अबुवहाब चौधरी मुम्बई के रहवासी और इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये एक समाचार एवं फिल्म लेखक है। वहाब पत्रकारिता में किसी किस्म का पक्षपात नहीं करते एवं ताज़ा खबरों की तलाश में रहते है। Email- abuwahabchaudhary@gmail.com

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