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बिहार में एनडीए गठबंधन की राहें मुश्किल, सहयोगियों के तेवर नहीं हो रहें हैं नरम

Published on November 09 2018 02:31 pm  |  Author: हितेश कुमार

बिहार में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चल रहे सीटों के समझौते को आखरी रूप देने में एनडीए के सभी दल काफी जोर आजमाइश कर रहे हैं। बिहार में लोकसभा की 40 सीटों के लिए भाजपा और जदयू के बराबर सीटों पर हुए समझौते के बाद अन्य सहयोगी दलों के साथ सीटों के तालमेल का अभाव स्पष्ट दिख रहा है।

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने पिछले दिनों बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार पर कटाक्ष करते हुए हमला बोला था। हालांकि उनकी पार्टी के नेताओं का कहना है कि पिछले चुनाव में 3 सीटों पर लड़ने के बाद तीनों सीट पर हम विजय हासिल किए थे। इसलिए हमें 3 सीट से कम मंजूर नहीं है। उधर, लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री पशुपति कुमार पारस ने जदयू के आने से अन्य सहयोगियों के सीटों में कमी किए जाने के दावों को हवा-हवाई करार दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में 7 सीटों पर लड़ी लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार 6 सीटों पर जीत हासिल की थी और सातवीं सीट केवल 7000 वोटों के अंतर से हारी थी। इसके बाद वर्तमान में लोक जनशक्ति पार्टी का ग्राफ जनता के बीच ऊपर उठा है। इसलिए उन्होंने कहा कि सात सीटों से कम लोजपा को मंजूर नहीं है। 

जनता दल यूनाइटेड से बराबर सीटों के तालमेल के बाद एनडीए में अन्य सहयोगियों को सम्मानजनक सीट दिए जाने के भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान के बाद एनडीए में सीटों के समझौता आसान नजर नहीं आ रहा है। लगातार चल रही माथापच्ची के बावजूद एनडीए के लिए समझौते की राह आसान नहीं है।

सबकी निगाहें राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की ओर टिकी है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एनडीए में चल रहे सीटों के समझौते की बातचीत के दौरान उपेंद्र कुशवाहा की तस्वीर तेजस्वी यादव के साथ सामने आ चुकी है। महागठबंधन के नेताओं के द्वारा लगातार कुशवाहा को आमंत्रण भी मीडिया के माध्यम से दिया जा रहा है। लेकिन कुशवाहा फूंक-फूंक कर कदम रखते नजर आ रहे हैं।

एनडीए के सभी सहयोगी दलों के साथ बैठक अभी तक नहीं हो सकी है। सहयोगियों की मांग है कि सभी दलों के एक साथ बैठक बुलाई जाए और सीटों के तालमेल पर बातचीत की जाए, जिससे अन्य दलों को भी सम्मानजनक माहौल में सम्मानजनक सीटें देने का वादा किया जा सके। आपको बता दें कि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड ने बिहार में सभी लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा था। जिसके बाद केवल 2 सीटों पर ही उसके उम्मीदवार जीत हासिल कर सके थे। उधर, एनडीए में 30 सीटों पर लड़ी भाजपा के 22, 7 सीटों पर लड़ी लोक जनशक्ति पार्टी 6 और 3 सीटों पर लड़ने वाली राष्ट्रीय लोक समता पार्टी अपने तीनों उम्मीदवारों को चुनाव जिताने में सफल रही थी। कुल मिलाकर जनता दल यूनाइटेड के बिना एनडीए ने बिहार की 40 लोकसभा सीटों में 31 सीटों पर अपना विजय पताका लहराने में कामयाब हुई थी। 

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि एनडीए में सीट समझौते की राह कठिन नजर आ रही हैं। एनडीए के छोटे सहयोगी दलों में रालोसपा और लोजपा दोनों अपनी सीट का त्याग करने को तैयार नहीं है। इस स्थिति में आने वाला समय ही बताएगा कि एनडीए में सीट समझौते को किस तरह से अमलीजामा पहनाया जाएगा। भाजपा अपने पुराने सहयोगियों को छोड़ने को तैयार नहीं है। उन्हें किसी भी हाल में मनाने का भरपूर कोशिश की जा रही है।

खबर यह भी है कि लोजपा को लोकसभा में 5 सीट पर समझौता लगभग फाइनल है। तथा सीटों के नुकसान की भरपाई के लिए भाजपा के समर्थन पर रामविलास पासवान को असम में मनमोहन सिंह की सीट से राज्यसभा भेजा जा सकता है। बावजूद समझौता नहीं बना तो बिहार में राजनीतिक समीकरण किस तरह का होगा, इसका अनुमान लाना अभी जल्दबाजी होगा।

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About हितेश कुमार
हितेश कुमार इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये पौथु (बिहार) के रहने वाले है। हितेश पत्रकारिता में अभिरुचि होने के कारण विभिन्न विषयों पर अपने विचार लिखने की काबिलियत रखते है। इन्होने पत्रकारिता के क्षेत्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त कर, विभिन्न मीडिया हाउस में कार्य किया है। Email- hiteshkumarminku@gmail.com

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