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वंशवाद का मुद्दा उठाने वाली बीजेपी खुद विपक्ष से परिवारवाद में आगे है

Published on November 20 2018 05:14 pm  |  Author: अबुवहाब चौधरी

मध्यप्रदेश चुनाव में बस चंद दिन बचे हुए है। जहाँ दोनों दिग्गज पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में जुटी है वहीँ बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने परिवारवाद को बढ़ावा दिया है। पर अगर देखा जाये तो बीजेपी ने प्रदेश के विधानसभा चुनाव में 20% टिकट अपने स्थापित नेताओ के परिजनों को दिए है। वहीं यह काम कांग्रेस ने मात्र 10 फीसदी में निपटा दिया है।

राजनीति में परिवारवाद व वंशवाद का इतिहास बहुत ही लम्बा व गहरा है। जहाँ कांग्रेस में गाँधी परिवार व उत्तरप्रदेश में सपा का वंशवाद वहीं बिहार में राजद यानि लालूप्रसाद व अन्य राज्यो में इस वंशवाद की जड़े अन्दर तक फैली हुई है। जहाँ राजनितिक दल एक दूसरे पर वंशवाद के आरोप लगाते है और इस परिवारवाद को ख़त्म करने की बात करते है। लेकिन यह परिवारवाद उस गीली टहनी की तरह है जो कुछ पलो के लिए झुक तो जाती है लेकिन टूटती बहुत मुश्किल से है। जहाँ बीजेपी वंशवाद का भी एक मुद्दा बनाकर केंद्र में सत्ता कबजाये हुए है तथा उत्तरप्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हाल बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में किया था और सत्ता में बैठी है।

आने वाले 28 नवम्बर को प्रदेश में जारी चुनावों की सूची में 20 फीसदी उम्मीदवार बीजेपी के परिजनों के है। कुल 230 विधासभा टिकट में से 45 टिकट बीजेपी ने अपने बड़े नेताओ के परिजनों को बांटे है। ऐसा नही की कांग्रेस इस मामले में पीछे रही है उसने भी 10 फीसदी यानि 230 में से 23 टिकट अपने बड़े नेताओ के रिश्तेदारों में दिए है। अगर देखा जाये तो 230 विधानसभा सीटो में से दोनों ही दिग्गज पार्टियों ने 68 सीट अपने वंशवाद को बढ़ाने के लिए दी है।

भाजपा ने टिकट बांटने से पहले कहा था कि एक परिवार में से एक ही व्यक्ति को टिकट मिलेगा। इसके चलते कैलाश विजयवर्गीय व मंत्री गौरीशंकर को अपने बेटो को टिकट दिलाने के एवेज में खुद का टिकट रोकना पड़ा।

भाजपा द्वारा अपने परिवार के लोगो को बांटे गए टिकट

दिव्यराजसिंह – सिरमौर से टिकट मिला, पूर्व विधायक पुष्पराज सिंह के बेटे है।

शिवनारायण सिंह – बांधवगढ़ से टिकट मिला, शहडोल के सांसद ज्ञानसिंह के बेटे है।

विक्रमसिंह – रामपुर बघेलन से टिकट मिला, शिवराज सरकार के वर्तमान मंत्री हर्ष सिंह के बेटे है।

देवेन्द्र वर्मा – वर्तमान विधायक खंडवा सीट से लड़ रहे है, मंत्री किशोरीलाल वर्मा के सुपुत्र है।

मंजू दादू – नेपानगर से मैदान में है, इनके पिता राजेन्द्र दादू यहीं से बीजेपी के विधायक होते थे।

अर्चना चिटनिस – बुरहानपुर से लड़ रही है, यह शिवराज सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री है।

अंतर सिंह पटेल - राजपुर से लड़ रहे है, ये पूर्व विधायक एवं मंत्री देवी सिंह पटेल के पुत्र है।

भाजपा में अन्य परिवारवाद वाले नेताओ की लम्बी फेहरिश्त है जैसे – अनिल फिरोजया, राजेन्द्र पांडे, राधेश्याम पाटीदार, यशपाल सिंह सिसोदिया, माधव मारू, जीतेन्द्र पांड्या, ओमप्रकाश सकलेचा, दीपक जोशी, आकाश विजयवर्गीय, मनोज पटेल, अजीत बौरासी, राजेंद्र वर्मा, सुधीर यादव, अर्चना सिंह, विजय शाह, कृष्णा गौर, राकेश चौधरी व् अन्य परिवारवाद को बढ़ावा देने वाले नेताओ के परिवारवाले है।

कांग्रेस भी परिवारवाद को बढ़ावा देने में कम नहीं है

कमलेश्वर पटेल – सिंघावल से कांग्रेस के मैदान में है, इन्द्रजीत पटेल कांग्रेसी के बेटे है।

सुन्दरलाल तिवारी – गूढ़ से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे है, वर्तमान विधायक श्रीनिवास तिवारी के बेटे है।

अरुणा तिवारी – कांग्रेस से मैदान में है, सुन्दरलाल तिवारी की भतीज बहु व श्रीनिवास तिवारी की नातिन बहु है।

अजय सिंह – चूरहूट से चुनाव लड़ रहे है पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे है।

विक्रांत भूरिया – सांसद कांतिलाल भूरिया के बेटे है।

कलावती भूरिया – जोबट से चुनावी मैदान में है, सांसद कांतिलाल भूरिया की भतीजी है।

राजेंद्र भारती – उज्जैन से टिकट मिला है पूर्व विधायक है इसके पिता जी।

कांग्रेस में भी अन्य परिवारवाद को बढ़ावा देने के लिए काफी बड़ी सूचि है जैसे – राजेन्द्र वरिष्ट, सचिन यादव, अरुण यादव, उमंग सिंघार, आलोक चतुर्वेदी, रणवीर सिंह जाटव, हेमंत कटारे, लक्ष्मण सिंह, सतपाल पलिया, हिना कावरे और अभय मिश्रा व अन्य नेताओ के परिवारवालों को कांग्रेस ने भी टिकट थमाया है।

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About अबुवहाब चौधरी
अबुवहाब चौधरी मुम्बई के रहवासी और इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये एक समाचार एवं फिल्म लेखक है। वहाब पत्रकारिता में किसी किस्म का पक्षपात नहीं करते एवं ताज़ा खबरों की तलाश में रहते है। Email- abuwahabchaudhary@gmail.com

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