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क्या संघ अब मोदी से ऊबकर नितिन गडकरी पर दांव खेलने की सोच रहा है?

Published on January 18 2019 01:53 pm  |  Author: अबुवहाब चौधरी

नितिन गडकरी भाजपा में एक दिग्गज नेता है और नितिन आजकल सुर्खियों में है। उनके भाषण आजकल भाजपा और मोदी दोनों के खिलाफ नज़र आते है। कुछ समय पहले नितिन ने कहा था कि अगर कोई राजनितिक दल कहीं चुनाव हारता है तो उस हार की जिम्मेदारी उसके मुखिया को लेनी चाहिए। यह तंज़ उन्होंने अमित शाह पर कसा था क्योकि अभी हाल ही में तीन राज्यों में मिली करारी शिकस्त के बाद भाजपा औंधे मुह जमीन पर आ गिरी थी। हालाकि बाद में उन्होंने इस बात से इंकार किया कि उनका कहने का ऐसा कोई मतलब नहीं था।

अब उन्होंने इंदिरा गाँधी की तारीफ़ करते हुए कहा था कि इंदिरा गाँधी एक मजबूत नेता थी। उन्होंने बिना किसी स्त्री आरक्षण के वह शीर्ष मुकाम हासिल किया था। हालाकि उन्होंने इस ही वार्ता में सुषमा स्वराज और बाकि अन्य स्त्रियों की तारीफ़ भी की थी लेकिन मीडिया ने इस इंदिरा वाली बात को खूब उछाला क्योकि यह एक कांग्रेसी नेता थी।

इस बात से भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि इंदिरा गाँधी कांग्रेस के बाकी नेताओ से ज्यादा संघ की पसंदीदा रही है। गडकरी की इस बात ने कांग्रेसियों के दिल में थोड़ी ख़ुशी दी और यह बात सभी जानते है कि नितिन गडकरी मोदी को पसंद नही करते है। इस महाराष्ट्र के नेता को कैसे मोदी और शाह की जोड़ी ने पीछे धकेल दिया। नितिन गडकरी को लगता है की उनके पर क़तर दिए गए है। क्योकि एक बार पीएमओ द्वारा उन्हें मीडिया कांफ्रेस में विदेशी यात्रा की इजाज़त ने देने का हवाला अकसर दिया गया था। चलो इस अफवाह ही मान ले तो क्या? यह बात तो अधिकारिक है कि आने वाले 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी का घोषणा पत्र तैयार हो रहा है। लेकिन पत्र तैयार करने वाली समिति में नितिन गडकरी को शामिल नहीं किया गया है।

लेकिन जानकारों का अनुमान है कि आरएसएस नागपुर निवासी गडकरी का समर्थन कर सकता है। क्योकि गडकरी को मिलनसार और सबको साथ लेकर चलने वाला नेता माना जाता है। NDA के लिए यह एक अच्छा चेहरा हो सकते है और शिव सेना भी गडकरी को पसंद करती है। मीडिया की लिस्ट में मोदी से ऊपर गडकरी का नाम चल रहा है। जो और तेज़ी से बढ़ने की सम्भावना में है। राहुल गाँधी का डर संघ को सता रहा है। अगर राहुल गाँधी देश के प्रधानमंत्री भी नहीं बनते है तो वह अपनी सहयोगियों के साथ मिलकर बीजेपी की सीटें कम कर सकते है।

क्योकि कांग्रेस ने तीन राज्यों में चुनाव जीतकर बीजेपी को जमीन पर ला खड़ा कर दिया है वहीं कर्नाटक में भी कांग्रेस की समर्थन वाली जेडीएस सत्ता में है। अब यह बात बीजेपी और संघ दोनों को सता रही है। राहुल गाँधी आजकल युवाओ में चर्चित है और यह बात बीजेपी बखूबी जानती है। कांग्रेस का अध्यक्ष भले ही पीएम के रूप में न देखा जा रहा हो लेकिन गडकरी भाजपा की तरफ से एक अच्छा नरम स्वभाव वाला चेहरा हो सकते है। गडकरी संघ के लिए एक अच्छा चेहरा हो सकते है क्योकि संघ अमित शाह की कामकाजी तानाशाही शैली से नाखुश है। केंद्र और राज्यों में कुछ नेताओ का मानना है कि राहुल नहीं चाहे फिर कोई भी हो।

लेकिन एक सवाल यह उठता है कि कहीं गडकरी मोदी जैसे तो नहीं? कहीं गडकरी राज में भी मोब लिंचिंग, अल्पसंख्यक के अधिकार व हिंदुत्व के मसले का पक्ष क्या है? क्या गडकरी के नेत्रत्व वाली सरकार भी शिक्षा व सरकारी संस्थाओ पर अपना कब्ज़ा तो नहीं चाहेगी?

मोदी की तुलना में संघ के पास एक लम्बी कतार है – राजनाथ, सुषमा, शिवराज सिंह, जेटली लेकिन इन सबसे ऊपर गडकरी संघ के लिए काम करते है। वैसे मोदी और शाह की जोड़ी जल्दी से मंच छोड़ने वाली नहीं है। क्योकि यहीं जोड़ी तय करेगी की गडकरी अपनी हद में ही रहे, क्योकि मोदी और शाह का जादू अभी भी जनता के सर चढ़कर बोलता है।

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About अबुवहाब चौधरी
अबुवहाब चौधरी मुम्बई के रहवासी और इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये एक समाचार एवं फिल्म लेखक है। वहाब पत्रकारिता में किसी किस्म का पक्षपात नहीं करते एवं ताज़ा खबरों की तलाश में रहते है। Email- abuwahabchaudhary@gmail.com

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