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बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार का दावा हुआ फेल, विगत 20 वर्ष में नहीं थी इतनी ख़राब स्थिति

Published on October 16 2018 04:08 pm  |  Author: हितेश कुमार

देश में लगातार बढ़ रही बेरोजगारी का चुनावी मुद्दा बना रहे विपक्ष को, बैठे-बिठाए एक और मुद्दा मिल गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी का स्तर अब तक के अंतिम 20 वर्षों में सबसे अधिक बताया गया है। 

अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज की स्टेट्स ऑफ वर्किंग इंडिया 2018 रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कई वर्षों में बेरोजगारी 2 फीसदी के आसपास रहने के बाद साल 2015 में यह आंकड़ा करीब 5 फीसदी  तक पहुंच गया। जो पिछले 20 वर्षों में बेरोजगारी दर सबसे अधिक है। श्रम मंत्रालय द्वारा 2015-16 में जारी आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कि गयी है। इसके अलावा युवाओं को रोजगार नहीं मिलने के कारण युवा बेरोजगारी में बेतहाशा वृद्धि हुई और यह 16 फीसदी  तक पहुंच गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, कि जीडीपी की वजह से रोजगार के उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। देश के सकल घरेलू उत्पाद में 10 फीसदी तक की वृद्धि के कारण रोजगार में 1 फीसदी  की भी वृद्धि नहीं हो सकी। 

इस रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के द्वारा नोटबंदी किए जाने के कारण भी रोजगार के उत्पादन प्रभावित हुई है। साथ ही साथ, जो लोग प्राइवेट क्षेत्र में कार्य कर रहे थे, उनकी छटनी भी की गई थी। जिसके बाद व्यापक रूप से  बढ़ती बेरोजगारी का असर दिखाई पड़ रहा था। 

इस रिपोर्ट में एक सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है की  एक तरफ देश में अंडर एंप्लॉयमेंट और कम मजदूरी की समस्या प्रमुख रूप से उठाया गया है, तो दूसरी तरफ उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं में बेरोजगारी की प्रतिशत में भी लगातार वृद्धि की बात कही है। युवा में बेरोजगारी लगभग 16 फीसदी के पास पहुंच गई है। जो देश के लिए बहुत बड़ी समस्या है। रिपोर्ट ने यह भी कहा गया है, कि बेरोजगारी का असर पूरे देश में दिखाई पड़ रहा है। लेकिन खासतौर पर उत्तर-प्रदेश बिहार और मध्य प्रदेश में बेरोजगारी का विकराल और भयावह रूप देखने को मिल रहे हैं।

गौरतलब है कि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव से पूर्व भाजपा सत्ता में आने पर हर साल 2 करोड लोगों को रोजगार मुहैया कराने का वादा किया था। लेकिन साढे 4 वर्ष बीत जाने के बाद इस रिपोर्ट ने मोदी सरकार के सभी दावों की हवा निकाल दिया। रिपोर्ट के मुताबिक जिन राज्यों में भाजपा और एनडीए की सरकार है, वहां की स्थिति ज्यादा दयनीय है। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार को उदाहरण के तौर पर रिपोर्ट में दिखाया गया है।

हाल ही में होने वाले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में इस रिपोर्ट का क्या असर होता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन विपक्ष सरकार के नीतियों पर लगातार हमला कर रही है। विपक्ष द्वारा रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद सरकार से कई सवाल पूछ रही है। साथ ही यह दावा भी किया जा रहा है, कि आने वाले चुनाव में सत्ता धारी दल के द्वारा जनता के साथ किए गए वादाखिलाफी का खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा।

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About हितेश कुमार
हितेश कुमार इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये पौथु (बिहार) के रहने वाले है। हितेश पत्रकारिता में अभिरुचि होने के कारण विभिन्न विषयों पर अपने विचार लिखने की काबिलियत रखते है। इन्होने पत्रकारिता के क्षेत्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त कर, विभिन्न मीडिया हाउस में कार्य किया है। Email- hiteshkumarminku@gmail.com

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