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उम्मीदवारो के खर्च पर चुनाव आयोग सख्त, समोसा खिलाने पर भी जोड़ा जाएगा चुनावी खर्च में

 Image Credit: File Photo

Published on October 10 2018 05:00 pm  |  Author: हितेश कुमार

राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के घोषणा के बाद राजनीतिक दल अपने-अपने चुनावी समर में जुट चुके हैं। वहीं चुनाव निर्वाचन आयोग भी पैनी नजर से राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के गतिविधियों को आंकने में जुटी है। चुनाव में राजनीतिक दलों और नेताओं के द्वारा तय सीमा से अधिक रुपए खर्च न करने पर निर्वाचन आयोग की पैनी नजर है।

चुनावों में पैसे के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए आयोग काफी सख्त है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कहा है कि यदि नियमों को ताक पर रख कर कोई उम्मीदवार चुनाव में खर्च करते हैं, तो उनपर कड़ी कार्यवाई की जाएगी। साथ ही साथ, यह भी कहा गया है, कि उम्मीदवारों को ₹10 हज़ार से ज्यादा की नकदी नहीं रखना होगा। 

राजनीतिक दलों के नेता चुनाव लड़ने के लिए टिकट के प्रबंध में जुटे हैं। तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग उनकी गतिविधियों को  ट्रैक करने में लगी है। चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक नामांकन से पूर्व उम्मीदवारों को एक बैंक खाता खोलना होगा और उसी खाते से पैसे का अंतरण करना होगा। अधिसूचना जारी होने के बाद राज्यो में आदर्श आचार संहिता लागू कर दि गयी है। बताया जा रहा है कि उम्मीदवार अपने समर्थकों को पानी की बोतल और समोसा भी खिलाते हैं, तो उसकी कीमत भी चुनावी खर्च में जोड़ी जाएगी। इसके अलावा चुनाव के दौरान किए गए कार्यक्रमों के खर्च भी उम्मीदवार को दिखाना होगा।

पिछले चुनाव की तुलना में इस बार चुनावी खर्च को बढ़ाते हुए आयोग ने 16 लाख रूपए से बढ़ाकर 28 लाख कर दिया है। इस फैसले का सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया। 

बता दें, हर बार चुनावी खर्च से संबंधित ब्यौरा आयोग को सौंपने को लेकर प्रत्याशियों पर आरोप लगाए जाते हैं। इसी को मद्देनजर रखते हुए चुनाव आयोग ने चुनावी खर्च की सीमा बढ़ाने का फैसला लिया है। चुनाव आयोग विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और स्वतंत्र उम्मीदवारों के द्वारा खर्च किए जा रहे रुपए पर भी निगाहें गड़ाए हुए है।

आयोग ने उम्मीदवारों के कार्यक्रमों के खर्च की सीमा पूर्व से ही निर्धारित कर रखी है। छोटे-बड़े कार्यक्रमों के लिए भी आयोग ने राशि निर्धारित किया है। जानकार बताते हैं कि चुनाव के बाद आयोग द्वारा गोपनीय ऑडिट कराया जा सकता है। जिससे उम्मीदवारों द्वारा सौंपे गए खर्च के ब्यौरे का पड़ताल किया जा सके। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने और चुनावी खर्च का हिसाब आयोग को नहीं सौंपने पर उम्मीदवारों पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है। पिछले राजस्थान विधानसभा चुनाव में कई उम्मीदवारों के द्वारा आयोग को चुनावी खर्चे हिसाब नहीं सौंपने पर कार्रवाई करते हुए 3 वर्षों तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। सीहोर विधानसभा क्षेत्र से दो उम्मीदवारों पर यह कार्रवाई कि गयी है।

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About हितेश कुमार
हितेश कुमार इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये पौथु (बिहार) के रहने वाले है। हितेश पत्रकारिता में अभिरुचि होने के कारण विभिन्न विषयों पर अपने विचार लिखने की काबिलियत रखते है। इन्होने पत्रकारिता के क्षेत्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त कर, विभिन्न मीडिया हाउस में कार्य किया है। Email- hiteshkumarminku@gmail.com

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