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OPINION: दिल्ली में बढ़ते “प्रदुषण” का इल्जाम किसानो पर लगा देते है क्योकि किसान कमजोर है इसलिए?

Published on November 02 2018 02:56 pm  |  Author: अबुवहाब चौधरी

दिल्ली में जब भी प्रदुषण बढ़ता है, जिसे जहरीला प्रदुषण भी कहते है, तब इस प्रदुषण का इल्जाम सभी लोग किसानो पर लगा देते है आखिर क्यों? क्या वे कमजोर है इसलिए? या वे सरकार और इल्जाम लगाने वाले को कड़ा जवाब नहीं दे सकते इसलिए? हालाकि ये वही किसान है जिनकी वजह से शहर में बैठे लोग यानी आप और हम रोटी, सब्जी व अन्य चीजे खाते है। इल्जाम लगाने वाले कहते है, कि किसान इस वक़्त धान की पुराली जलाता है जिस वजह से ये प्रदुषण फैलता है। आखिर किसान वर्षो से खेती करता आ रहा है क्या अब ही पांच या छः सालो से ही किसान पुराली जला रहा है।

द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टिट्यूट (TERI) की ताज़ा रिपोर्ट ने बताया कि पुराली और बायोमास की वजह से सिर्फ 4% प्रदुषण में योगदान है। आल इंडिया किसान संघर्ष कोओर्ड़ीनेशन कमेटी AIKSC के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि किसानो को जिम्मेदार ठहराना छोड़ दे। दिल्ली में दशहरा पर हर गली में पटाखे, फैक्ट्री के धुंए, पॉवर प्लांट, वाहनों का धुँआ व और भी अन्य कारण है दिल्ली में प्रदुषण बढ़ने के जिनसे यह जहरीला प्रदुषण बढ़ता है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वोइरमेंट एक्जक्युटिव डायरेक्टर अनुमिता राय चोधरी ने कहा कि दिल्ली में अपना भी प्रदूषण है धान साल के साल नहीं कटती। इसलिए इस जहरीले प्रदुषण के लिए किसानो पर इल्जाम लगाना ठीक नहीं है।

दिल्ली में बढ़ते वाहन, बढ़ते इंडस्ट्री प्लांट और बिजली उत्पादन सयंत्र इत्यादि भी इसके लिए जिम्मेदार है। इस बार चेतना बहुत सख्त है इसलिए दिल्ली में दोनों प्लान यानी इमरजेंसी प्लान और को-ओप्रेहेंसिव क्लीनर एक्शन प्लान पर काम किया जा रहा है। इमरजेंसी प्लान में बदरपुर प्लांट बंद करना, डीजल जेनरेटर सेट पर रोक निर्माण कार्यो पर प्रतिबन्ध व इत्यादि emergency प्लान में आते है। दूसरे प्लान में शोर्ट और लॉन्ग टर्म योजनाये लागू होती है। अगर इसे इमानदारी और सख्ती से निभाया गया तो अवश्य ही दिल्ली में प्रदुषण का स्तर गिरेगा।

दिल्ली में वाहनों से प्रदुषण का प्रतिशत कुछ इस प्रकार है –पीएम यानि पार्टिकुलेट मैटर 2.5 के लिए यहाँ वाहनों से होने वाले प्रदुषण में 28% योगदान इनसे है। जहाँ ट्रक और ट्रेक्टर से 9%, दो पहिया वाहनों से 7%, तीन पहिया वाहनों से 4% व बस और कार से 3% प्रदुषण फैलता है। दिल्ली में पीएम 2.5 में धुल से होने वाला प्रदुषण 18% है जिसमे सडको पर धुल से 3% व निर्माण कार्यो से 1% बाकि अन्य वजह से 14% प्रदुषण फैलता है।

दिल्ली में पीएम 2.5 से होने वाले प्रदुषण में 30% योगदान इंडस्ट्री से है. जिसमे पॉवर प्लांट 6%, ईंटो से 8%, पत्थर क्रेश से 2% जबकि अन्य छोटी-बड़ी इंडस्ट्री से 14% फैलता है।

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Tags: #delhi    #Pollution    #Farmer    #The Energy and Resources Institute    #AIKSC    #farmers    #air pollution    #india   

About अबुवहाब चौधरी
अबुवहाब चौधरी मुम्बई के रहवासी और इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये एक समाचार एवं फिल्म लेखक है। वहाब पत्रकारिता में किसी किस्म का पक्षपात नहीं करते एवं ताज़ा खबरों की तलाश में रहते है। Email- abuwahabchaudhary@gmail.com

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