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कांग्रेस का इससे ज्यादा बुरा वक़्त नहीं आ सकता!

Published on November 10 2018 11:12 pm  |  Author: अबुवहाब चौधरी

कांग्रेस! ऐसी पार्टी जिसने आजादी से अब तक अपना लोहा मनवाया। जो पूरे भारत में बरगद की तरह फैली हुई थी आज वह पार्टी अपने बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। इस पार्टी के कार्यकर्ता और बिखरे संगठन इस कदर हताश है की वह पुराने रूप में आने के लिए हर दम कोशिश कर रहे है। कांग्रेस पार्टी ने 2 दशक के बाद अपना नया अध्यक्ष चुना है जो अध्यक्ष चुना है वह पार्टी के कुछ लोगो को सही नहीं लग रहा है। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले है जिनसे कांग्रेस अपनी डूबती नैया को पार लगाने की कोशिश में जुटी है। लेकिन इससे पहले पार्टी को जबरदस्त तरीके से हर चुनौती को पार करना होगा जो बिलकुल भी आसान नहीं है। वैसे भी 3 राज्यों में बसपा से कांग्रेस का विलय नहीं हो पाया जिससे कुछ नुकसान होने की सम्भावना है।

मध्यप्रदेश से शुरुआत करे तो कांग्रेस में एक पार्टी के भीतर अनेको पार्टिया व खेमे बनते रहे, जो पार्टी के अन्दर एक बड़ा नेता खेमा मजबूत करता रहा और पार्टी को कमजोर करता रहा। इस बार भी दिग्विजय सिंह, सुरेश पुचोरी, कमलनाथ व ज्योतिरादियता सिंधिया कांग्रेस के ही समर्थक है। पिछले 15 सालो से शिकस्त के बाद कांग्रेस अबकी बार पूरी उम्मीद जता रही है कि इस बार उनकी सरकार बनेगी। दरसल पहली बार ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी के लोग अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को दिल से अध्यक्ष नहीं मान रहे है। राहुल गांधी ने अबकी बार स्थानीय लोगो को टिकट न देकर स्थानीय लोगो में उम्मीद दी है। यहीं दशा 1980 में भी थी जब मतदाताओ ने सिर्फ इंदिरा गाँधी के चेहरे को देखकर वोट किया था और पार्टी सत्ता में आ गयी थी। 

राहुल गाँधी ने बीजेपी वाली नीति अपनाई है वह बीजेपी के कुछ रूठे हुए नेताओ को अपनी पार्टी में शामिल कर रहे है और उन्हें टिकट दे रहे है। हालाकि इससे कांग्रेस पार्टी के अन्दर थोड़ी बगावत हो रही है पर कांग्रेस इस बार मध्यप्रदेश में हर कीमत पर सत्ता चाहती है। यहीं दांव पिछले चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस के साथ खेला था।

राजस्थान में कांग्रेस की हालत अबकी पहले से बेहतर है क्योकि अबकी बार कांग्रेस वहां टूटी नहीं है। अशोक गहलावत, सचिन पायलट दोनों ही पक्ष मजबूत है और दोनों ने पार्टी के अन्दर जान फूंक रखी है। अबकी बार राजस्थान में हर अनुमान कांग्रेस के पक्ष में चल रहा है तथा कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओ में उम्मीद जगी हुई है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए हालत थोड़ी लाचार है। पिछली बार दोनों ही पार्टी के वोट में बस 1% का अंतर था जिसमे बीजेपी ने अंतिम मौके पर बाजी मार ली थी। नोटा के इस्तेमाल में सबसे अव्वल पर छत्तीसगढ़ था। 3% वोट नोटा को गए थे। अगर अबकी बार भी 3% वोट नोटा में गए और जोगी व बसपा गठबंधन ने 5% वोट ले लिए तो कांग्रेस फिर हारने किए कगार पर आ सकती है।

तेलंगाना में कांग्रेस अपनी खोयी हुई किस्मत को पाने में लगी हुई है। 119 विधानसभा सीटो वाले राज्य में 14 सीट पाकर दूसरी बड़ी पार्टी थी। तेलगुदेशम भी खुद को चमकाना चाहती है वहीं दोनों पार्टी का गठबंधन भी अहम भूमिका में है क्योकि यह गठबंधन टीआरएस की चुनोती बढ़ा सकता है टीआरएस के पास अभी 90 सीट है जो घटकर 70 होने की उम्मीद है, अगर यह हुआ तो इससे अवश्य ही कांग्रेस को लाभ मिल सकता है।

वहीं बात मिजोरम की करे तो यहाँ कांग्रेस को कोई मुश्किल नहीं है क्योंकी यहाँ 40 विधान सभा सीटो में से 34 कांग्रेस के पास है। तथा बीजेपी को यहाँ खाता खोलना है। हालाकि बीजेपी ने कांग्रेस के दिग्गज नेता हिफई को अपने साथ मिलाकर कांग्रेस को मात देने की कोशिश की है।अब देखते है कांग्रेस कहाँ-कहाँ जीतेगी क्योकि यहीं से लोकसभा का दृष्टिकोण नापा जायेगा।

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About अबुवहाब चौधरी
अबुवहाब चौधरी मुम्बई के रहवासी और इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये एक समाचार एवं फिल्म लेखक है। वहाब पत्रकारिता में किसी किस्म का पक्षपात नहीं करते एवं ताज़ा खबरों की तलाश में रहते है। Email- abuwahabchaudhary@gmail.com

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