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उपचुनाव के नतीजों से महागठबंधन की कोशिशों को मिलेगा बल

Published on November 08 2018 03:29 pm  |  Author: हितेश कुमार

विगत 3 नवंबर को कर्नाटक में 3 लोकसभा और 2 विधानसभा उपचुनाव के परिणाम के बाद राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाए जाने को लेकर चर्चाएं एक बार फिर गर्म हो गई। कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस के नेतृत्व वाली महागठबंधन 5 ने में से 4 सीटों पर विजय हासिल किया। आपको बता दें कि लोकसभा के 3 सीटों में से 2 सीटों तथा विधानसभा के दोनों सीटों पर भारी अंतर के साथ कांग्रेस-जेडीएस गठजोड़ ने अपना परचम लहरा कर भाजपा को करारा झटका दिया है। उपचुनाव के नतीजों के वजह से भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की कोशिशें तेज होंगी।

आने वाले लोकसभा चुनाव 2019 के लिए देश भर की क्षेत्रीय पार्टियां एंटी बीजेपी एलाइंस बनाकर चुनाव में जाने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उपचुनाव के परिणामों से सभी क्षेत्रीय दल अपने आपसी मतभेदों भुलाकर महागठबंधन बनाने के प्रयास को बल मिलेगा, जो भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अकेले चुनाव मैदान में जाने की बात कर रहे हैं। कर्नाटक में हुए उपचुनाव के परिणाम में सबसे खास बेल्लारी की लोकसभा सीट रही, जिस पर 14 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस ने वापस कब्जा जमाया। महागठबंधन के प्रमुख सहयोगी मानी जा रही बसपा सुप्रीमो मायावती के अलग रुख अख्तियार किए जाने के दौरान उपचुनाव के परिणाम उनके रुख में बदलाव ला सकता है। 

इसके पूर्व कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से रोकने के कोशिश में जुटी जनता दल सेकुलर के नेता एचडी कुमार स्वामी के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनाई। केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता का प्रदर्शन एचडी कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में दिखा था, जिस में विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने  इस समारोह में हिस्सा लिया था। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सीटों के समझौते के मुद्दे पर वार्ता सफल न हुई तो नाराज मायावती ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। साथ ही साथ, भविष्य में कांग्रेस से गठजोड़ के सभी संभावनाओं को खारिज किया था। बीएसपी के अलावा आम आदमी पार्टी में भी महागठबंधन में शामिल होने की संभावना से अभी तक इनकार किया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी भाजपा के विरूद्ध अकेले चुनाव में जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है, कि क्षेत्रीय पार्टियों के उनके अस्तित्व उन्हें एक साथ आने को मजबूर करेगी। विश्लेषण बताते हैं कि जिस तरह से विपक्ष कर्नाटक के उपचुनाव में काम किया है, ठीक उसी प्रकार से लोकसभा चुनाव 2019 में एंटी बीजेपी एलाइंस बनाकर चुनाव में जाए, तो भाजपा को कड़ी टक्कर दी जा सकती है।

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About हितेश कुमार
हितेश कुमार इंडिया-पॉलिटिक्स में बतौर फ्रीलांसर कार्यरत है। ये पौथु (बिहार) के रहने वाले है। हितेश पत्रकारिता में अभिरुचि होने के कारण विभिन्न विषयों पर अपने विचार लिखने की काबिलियत रखते है। इन्होने पत्रकारिता के क्षेत्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त कर, विभिन्न मीडिया हाउस में कार्य किया है। Email- hiteshkumarminku@gmail.com

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